45°C गर्मी चुपके से बर्बाद कर रही है दिल, किडनी और ब्रेन | गर्मी में इन अंगों को बचाने के 10 जरूरी उपाय | SwasthFitBharat
45°C से ज्यादा गर्मी दिल, किडनी और दिमाग को चुपके-चुपके नुकसान पहुंचा रही है। बच्चों, बुजुर्गों और आउटडोर वर्कर्स पर सबसे ज्यादा असर। लक्षण, खतरे और बचाव के उपाय जानें।
45°C गर्मी चुपके से बर्बाद कर रही है दिल, किडनी और ब्रेन: डॉक्टर्स का बड़ा अलर्ट
नई दिल्ली/मुंबई। भारत के कई हिस्सों में लगातार 44-45°C या उससे ज्यादा तापमान हो रहा है। गर्मी अब सिर्फ मौसमी परेशानी नहीं रही, बल्कि यह दिल, किडनी, ब्रेन और पूरे शरीर को चुपके-चुपके स्थायी नुकसान पहुंचा रही है। डॉक्टर्स चेतावनी दे रहे हैं कि हीट स्ट्रोक जैसी घटनाओं से ज्यादा खतरनाक है लंबे समय तक गर्मी का लगातार एक्सपोजर।डॉ. राकेश गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली कहते हैं, “शरीर को लगातार कूलिंग मोड में रहना पड़ रहा है। इससे फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होती है, नींद खराब होती है, थकान बढ़ती है और कई अंगों पर दबाव पड़ता है।”
गर्मी कैसे नुकसान पहुंचाती है? (मुख्य प्रभाव)दिल (Heart) पर बोझ
शरीर खुद को ठंडा करने के लिए ब्लड को स्किन की तरफ भेजता है और हार्ट रेट बढ़ जाता है। लंबे समय तक यह हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और अतालता (arrhythmia) का खतरा बढ़ा देता है।
किडनी (Kidneys) पर असर
बार-बार डिहाइड्रेशन से यूरिन कंसंट्रेट हो जाता है, टॉक्सिन्स जमा होते हैं और किडनी स्टोन व क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। कई लेबर क्लास के लोगों में यह समस्या आम हो गई है।
ब्रेन और मेंटल हेल्थ
गर्मी नींद खराब करती है, कॉग्निशन (सोचने-समझने की क्षमता) कम करती है, चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और डिप्रेशन बढ़ाती है। गर्म रातों में बॉडी रिकवर नहीं कर पाती।
कौन सबसे ज्यादा खतरे में?बच्चे: उनका शरीर तेजी से गर्म होता है, पसीना कम निकलता है और डिहाइड्रेशन तेजी से होता है। माता-पिता को थकान, चिड़चिड़ापन, कम पेशाब या भूख न लगने जैसे लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए।
आउटडोर वर्कर्स और युवा: लगातार थकान, सिरदर्द, मसल क्रैंप, नींद की समस्या और किडनी स्ट्रेस आम है। पसीना बंद हो जाना बहुत खतरनाक संकेत है।
बुजुर्ग: थर्मोरगुलेशन की क्षमता कम होने से छोटी-छोटी समस्या भी जानलेवा बन सकती है। कन्फ्यूजन, नींद ज्यादा आना या खाना न खाना सामान्य बूढ़ापे का लक्षण नहीं, बल्कि हीट स्ट्रेस हो सकता है।
हॉट नाइट्स का छिपा खतराशहरों में रात का तापमान 30°C से ऊपर रहने लगा है। इससे शरीर को रात में ठंडक मिलने का मौका नहीं मिलता। नतीजा: अगले दिन और ज्यादा थकान, हाई हार्ट रेट और कम रिकवरी।बचाव के प्रभावी उपाय (Prevention Tips)सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स जरूरी: ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS), छाछ, नारियल पानी, नमक वाला पानी या इन्फ्यूज्ड वॉटर पिएं।
पीक आवर्स (12 बजे से 4 बजे) से बचें: बच्चों और बुजुर्गों को बाहर न भेजें।
ठंडक के तरीके: गर्दन, पैरों और कांख को ठंडे पानी से पोछें। अच्छी वेंटिलेशन रखें। पंखे अकेले काफी नहीं होते।
नींद का ध्यान: रात में कमरे को ठंडा रखने की कोशिश करें।
लक्षणों पर नजर: बार-बार थकान, सिरदर्द, चक्कर, पसीना न आना, कम पेशाब – इनमें डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉ. प्रशांत बोराडे, डायरेक्टर-ICU, ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, मुंबई कहते हैं कि गंभीर मामलों में मसल ब्रेकडाउन, किडनी-लीवर स्ट्रेन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन आम है।निष्कर्षगर्मी अब सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि एक साइलेंट हेल्थ क्राइसिस बन गई है। सही समय पर सावधानी बरतकर हम अपने और अपने परिवार के दिल, किडनी और दिमाग को सुरक्षित रख सकते हैं।स्वस्थ रहें, फिट रहें!
अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को ऊपर बताए लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
(Source: TheIndianExpress.com)

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